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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

भारत अभी नहीं कर रहा क्रिप्टो डेटा संग्रह और व्यापक विनियमन: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कहा कि भारत क्रिप्टो डेटा संग्रह या पूर्ण नियमन नहीं करता, लेकिन VDA टैक्स, TDS और ED जांच के जरिए निगरानी जारी है।

भारत अभी नहीं कर रहा क्रिप्टो डेटा संग्रह और व्यापक विनियमन: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने  दिसंबर 8 को  लोकसभा सत्र के दौरान स्पष्ट किया कि भारत सीमाहीन मानी जाने वाली क्रिप्टो इंडस्ट्री के लिए न तो डेटा संग्रह करता है और न ही उसे नियंत्रित करता है।

यह कथन इस पृष्ठभूमि में आया है कि कई देशों में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कड़े नियामक एवं पारदर्शिता आधारित ढांचे बनाए जा रहे हैं। हालांकि, भारत में फिलहाल कोई पूर्ण पैमाने पर नियमन नहीं है।

लेकिन, सरकार ने यह भी कहा कि वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) से जुड़े लेनदेन पर निगरानी और जांच को मजबूत किया जा रहा है, खासकर उन मामलों में जो धन शोधन या अपराध-संबंधी हो सकते हैं।

टैक्स, TDS और जांच: मौजूदा ढांचा कैसे काम करता है

वर्तमान में क्रिप्टो ट्रेडिंग से होने वाले मुनाफे पर 30% टैक्स लगता है, साथ में 4% सेस। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति का क्रिप्टो लेनदेन सालाना ₹10,000 से अधिक है, विशिष्ट व्यक्तियों या संस्थानों के लिए ₹50,000), तो उस पर 1% TDS लागू है।

इन प्रावधानों का उद्देश्य कर चोरी और अघोषित आय को रोकना है। वास्तव में, सरकार ने बताया कि खोज व जब्ती ऑपरेशन में VDA से जुड़ा ₹888.82 करोड़ का अघोषित आय पाया गया।

इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक उन मामलों में कार्रवाई की है जहाँ क्रिप्टो से संबंधित अपराध या धन शोधन की संभावना थी। ED ने कुल ₹4,189.89 करोड़ के अपराध-आय को अटैच या सीज़ किया है और 29 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है।

केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने 44,057 करदाताओं को नोटिस भेजे हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) से जुड़े अपने लेनदेन का विवरण आयकर रिटर्न में दर्ज नहीं किया था।

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विशेषज्ञों की चेतावनी: नियमन में देरी नवाचार को धीमा कर सकती है

सरकार अभी पूर्ण-पैमाने पर क्रिप्टो नियमन से बच रही है, जबकि विशेषज्ञों एवं उद्योग जगत में अब आवाज़ उठ रही है कि भारत को शीघ्र एक डिजिटल परिसंपत्ति नीति बनानी चाहिए।

कुछ विशेषज्ञों ने यह चेतावनी दी है कि इस अनिश्चितता की स्थिति में नवाचार पर असर पड़ेगा और प्रतिभाशाली निवेशक या स्टार्ट-अप्स विदेशों की ओर रुख कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, RBI सहित अन्य संस्थाएँ बार-बार बता चुकी हैं कि क्रिप्टो एसेट्स को मुख्यधारा की वित्तीय प्रणालियों में शामिल करना जोखिम भरा हो सकता है, विशेषकर उनकी अस्थिरता और संभावित धोखाधड़ी के कारण।

भारत का तेजी से बढ़ता क्रिप्टो उपयोग

दुनियाभर में जैसे-जैसे क्रिप्टोकरेंसी स्वीकार्यता पा रही है, वैसे ही भारत में भी क्रिप्टो क्रांति की रफ्तार तेज़ हुई है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत ने न सिर्फ रिटेल उपयोग में बल्कि संस्थागत व स्टेबलकॉइन प्रवाह में भी महत्वपूर्ण विकास देखा है।

छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में क्रिप्टो ट्रेडिंग बढ़ी है, काफी हद तक इनकम की अस्थिरता और पारंपरिक बचत विकल्पों की कमी की वजह से। अगर भारत चाहता है कि यह बाजार स्थायी और भरोसेमंद बने, तो एक स्पष्ट, समन्वित और पारदर्शी नियामक ढांचे की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

भारत सरकार इस समय क्रिप्टो इंडस्ट्री पर डेटा संग्रह या व्यापक नियमन नहीं करती,  जैसा कि वित्त मंत्री ने संसद में स्पष्ट किया। हालाँकि सीमित कर प्रावधान, TDS और ED द्वारा सक्रिय निगरानी जैसे कदम क्रिप्टो लेनदेन को पूरी तरह अनियंत्रित नहीं छोड़ते। 

फिर भी, धीरे-धीरे बढ़ रही क्रिप्टो स्वीकृति, बढ़ते निवेश और संभावित जोखिमों को देखते हुए, इस क्षेत्र में सकारात्मक, स्थायी और पारदर्शी विकास के लिए एक सुसंगठित और स्पष्ट नियामक नीति बनाना समय की मांग है।

अगर ऐसा नहीं हुआ तो, न तो निवेशकों को सुरक्षा मिलेगी और न ही भारत क्रिप्टो के विकास को स्थायी रूप दे पाएगा।

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