भारत में डिजिटल निवेश के बढ़ते क्रेज के बीच गंभीर धोखाधड़ी के मामले भी सामने रहे हैं जो एक गंभीर चिंता का विषय है। हाल ही में दो वरिष्ठ नागरिकों को नकली क्रिप्टो और शेयर ट्रेडिंग प्लेटफार्मों में निवेश के नाम पर कुल 3.2 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का शिकार बनाया गया, जिससे पुलिस ने गंभीर चेतावनी जारी की है।
पुलिस के अनुसार, इन दोनों पीड़ितों को सामाजिक संदेश मंचों और ऑनलाइन समूहों के माध्यम से जोड़ा गया। पहले मामले में एक 61 वर्षीय सेवानिवृत्त रक्षा विभाग के कर्मचारी को ‘एपी हेल्पिंग हैंड इंडिया’ नामक टेलीग्राम समूह में जोड़ा गया, जहां धोखेबाजों ने क्रिप्टो आर्बिट्रेज में भारी लाभ का झांसा दिया।
पीड़ित से पहले 8,500 रुपये नाम मात्र शुल्क के रूप में लिए गए और फिर निवेश जारी रखने का दबाव बनाया गया। नकली डैशबोर्ड पर उसकी “बढ़ती संपत्ति” दिखाई गई, जिससे उसने भरोसा कर लिया। पुलिस ने बताया कि उसके खाते को धोखेबाजों ने नियंत्रित कर लिया और वह कुल 2.58 करोड़ रुपये से अधिक गंवा बैठे।
दूसरे मामले में 69 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक को भी इसी तरह के झांसे में फंसाया गया और 63.15 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाल ली गई। दोनों मामलों में अपराधियों ने व्यक्तिगत और बैंक विवरण हासिल करने के बाद खाते पर नियंत्रण कर लिया और भारी राशि धोखाधड़ी के रूप में हड़प ली।
क्रिप्टो धोखाधड़ी का कारण
भारत में क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल निवेश की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। एक ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि देश में लगभग 2.5 करोड़ निवेशक डिजिटल संपत्तियों में सक्रिय हैं, जो छोटे शहरों तथा महिलाओं को भी शामिल करते हुए निवेश के नए आयाम खोल रहे हैं।
हालांकि, इसी लोकप्रियता ने धोखेबाजों के लिए बड़े अवसर भी पैदा कर दिए हैं। साइबर अपराधियों द्वारा तैयार किए गए नकली निवेश मंच, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे संदेश समूहों में निवेशकों को आकर्षक वादों के साथ जोड़ा जाता है। अंजान निवेशक, विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिक, उच्च लाभ के वादे में फंसकर अपनी जीवनभर की बचत खो बैठते हैं।
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देश भर में ऐसे कई अन्य मामले भी पुलिस जांच के दायरे में हैं। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र के ठाणे में 78 साल के बुजुर्ग से 1.06 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का मामला दर्ज किया गया। आरोपियों ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से उन्हें निवेश के लिए प्रेरित किया और बाद में संपर्क बंद कर दिया।
इसी प्रकार, दिल्ली के वसंत कुंज में दो वरिष्ठ नागरिकों को 1.5 करोड़ रुपये से अधिक की निवेश धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा, जिसमें नकली निवेश ऐप और बड़े मुनाफे के वादे दिखाकर उन्हें फंसाया गया।
पुलिस और प्राधिकरणों की प्रतिक्रिया
इन धोखाधड़ी के मामलों के सामने आने के बाद, साइबर अपराध पुलिस ने जांच तेज कर दी है और प्रत्यक्ष रूप से अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस आम जनता को सतर्क रहने और किसी भी निवेश योजना में शामिल होने से पहले सत्यापन करने की सलाह दे रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल निवेश में शामिल होने से पहले निवेशकों को प्लेटफॉर्म की वैधता, कानूनी पंजीकरण और उपयोगकर्ता समीक्षा जैसी कई बातों की जाँच करनी चाहिए। किसी भी समूह या व्यक्ति से आए निवेश सुझावों पर तुरंत भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
निष्कर्ष
भारत में क्रिप्टो और डिजिटल निवेश के बढ़ते रूझान के बीच धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक जैसे कमजोर वर्ग विशेष रूप से ऐसे अपराधियों के निशाने पर आ रहे हैं। निवेश से पहले सावधानी और उचित जांच-परख न केवल धन की सुरक्षा करेगी, बल्कि साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई को भी मजबूत करेगी। देशव्यापी जागरूकता और सख्त कानूनी कार्रवाई से ही इन तरह की धोखाधड़ी पर काबू पाया जा सकता है।
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