पुणे के हिंजवाड़ी में रहने वाले एक 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर को क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर साइबर ठगों ने लगभग 34 लाख रुपये से अधिक की ठगी का शिकार बनाया है। आरोपी साइबर धोखेबाजों ने 40 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न का आकर्षक वादा देकर जल्दबाजी में भारी रकम निवेश करने के लिए राजी किया, लेकिन बाद में उन्होंने न केवल रिटर्न रोका बल्कि मूल धन भी वापस नहीं किया।
ठगी का तरीका
पुलिस के अनुसार, इस मामले का आरंभ 18 अक्टूबर 2025 को एक अंजान मोबाइल नंबर से हुए फोन कॉल के साथ हुआ। कॉल करने वाले ने खुद को एक निवेश फर्म का प्रतिनिधि बताया और उच्च लाभ का लालच देकर पीड़ित से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने को कहा।
शुरुआती दौर में पीड़ित ने थोड़ी राशि ट्रांसफर की, जिसके बदले उसने तत्काल लाभ के रूप में कुछ रकम प्राप्त की, जिससे उसकी विश्वास जीता गया। इसके बाद उसने लगातार ठगों द्वारा दी गई बैंक डिटेल्स में पैसे भेजने शुरू कर दिए और 30 अक्टूबर तक कुल लगभग ₹34 लाख जोड दिए।
जब अधिक पैसा मांगने के बावजूद ठग न केवल रिटर्न देना बंद कर दिए बल्कि मूल निवेश भी वापस नहीं लौटाया, तब पीड़ित को धोखे का एहसास हुआ और उसने पिंपरी-चिंचवाड़ साइबर पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और संबंधित खातों और मोबाइल नंबरों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।
क्रिप्टो निवेश में धोखाधड़ी का बढ़ता रूझान
भारत में क्रिप्टोकरेंसी के प्रति रुचि में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है, लेकिन इसी के साथ डिजिटल निवेश धोखाधड़ी के मामलों में भी इजाफा हो रहा है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024–25 में क्रिप्टो लेन-देन ₹51,000 करोड़ से अधिक हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 41 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
हालांकि क्रिप्टो खुद एक वैध डिजिटल संपत्ति है, लेकिन अनधिकृत और अविश्वसनीय प्लेटफार्मों तथा संदिग्ध समूहों द्वारा निवेशकों को झांसा देकर पैसे हासिल करने की स्नायबारी में वृद्धि हुई है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, धोखाधड़ी करने वाले अक्सर आकर्षक लाभ का वादा करते हैं, छोटी-छोटी राशियों पर तुरंत लाभ दिखाकर भरोसा जता लेते हैं, फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम का निवेश कराने में सफल होते हैं। एक बार जब भारी रकम जमा हो जाती है, तो वे सम्पर्क तोड़ देते हैं या और अधिक धन की मांग करते हैं, जिससे पीड़ितों को भारी वित्तीय नुकसान होता है।
साइबर धोखाधड़ी के अन्य मामलों की झलक
हिंजवाड़ी के इस मामले के अलावा पुणे और आसपास के इलाकों में अन्य साइबर धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। उदाहरण के लिए, एक निजी कंपनी के कर्मचारी को क्रिप्टो निवेश के नाम पर ₹25 लाख की ठगी की शिकायत दर्ज हुई थी, जिसमें पीड़ित को 30 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर फंसाया गया था।
इसी प्रकार अन्य स्थानों पर शेयर ट्रेडिंग या डिजिटल निवेश के प्रसंग में भी तकनीकी पेशेवरों और वरिष्ठ नागरिकों को झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी के मामले प्रकाश में आए हैं। यह दर्शाता है कि साइबर धोखाधड़ी के तरीकों में विविधता और परिष्कार दोनों ही बढ़े हैं।
पुलिस की भूमिका और सुझाव
पिंपरी-चिंचवाड़ साइबर पुलिस अधिकारियों ने इन प्रकार के मामलों में सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले निवेश प्लेटफॉर्म की सत्यता की जांच करें। अज्ञात व्यक्तियों द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें और बिना पुष्टि किए किसी भी बैंक विवरण में भारी रकम न भेजें।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसी संदिग्ध कॉल, संदेश या ईमेल से सतर्क रहें और यदि उन्हें किसी निवेश योजना में अनिश्चय हो तो तुरंत साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क करें। साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ पुलिस की जांच जारी है और दोषियों को पकड़ने के लिए तकनीकी रूप से जांच की जा रही है।
निष्कर्ष
डिजिटल निवेश के समय सावधानी अत्यंत आवश्यक है। उच्च लाभ का लालच देकर लोगों को क्रिप्टो या अन्य निवेश योजनाओं में फंसाने वाले साइबर ठग वित्तीय नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी भी पैदा करते हैं। इसलिए समय रहते सतर्क रहकर और सही जानकारी लेकर ही निवेश को चुनना चाहिए।
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