भारत में क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन, ब्लॉकचेन तकनीक और आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों (VDA) को लेकर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। संसद से लेकर उद्योग जगत तक, सभी पक्ष यह मानने लगे हैं कि मौजूदा नीति न तो निवेशकों को स्पष्टता देती है और न ही देश को इस उभरते डिजिटल क्षेत्र का पूरा लाभ उठाने देती है।
संसद में उठा क्रिप्टो का मुद्दा
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में सरकार की मौजूदा क्रिप्टो नीति पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी को “कर के लिए वैध, लेकिन नियमन के लिए अवैध” मानने का रवैया अपनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जब सरकार क्रिप्टो लेन-देन से 30 प्रतिशत कर और 1 प्रतिशत स्रोत पर कर कटौती (TDS) वसूल रही है, तो इसका अर्थ है कि यह परिसंपत्ति वर्ग अस्तित्व में है। इसके बावजूद, इसके लिए आज तक कोई स्पष्ट कानूनी ढांचा या नियामक प्रणाली तैयार नहीं की गई।
राघव चड्ढा ने कहा कि निषेध से निवेशकों की सुरक्षा नहीं होती, बल्कि मजबूत और पारदर्शी नियमन से ही धोखाधड़ी और अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सकती है।
क्रिप्टो कारोबार का विदेशों की ओर पलायन
सांसद चड्ढा ने यह भी चेतावनी दी कि नीति-स्तर की अनिश्चितता के कारण भारत का बड़ा क्रिप्टो व्यापार विदेशी प्लेटफॉर्मों पर जा रहा है। इससे न केवल देश को संभावित कर राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि स्टार्टअप, रोजगार और तकनीकी नवाचार भी प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्पष्ट नियम बनाए जाएं तो भारत का अधिकांश डिजिटल परिसंपत्ति कारोबार दोबारा देश के भीतर आ सकता है।
CoinDCX के सुमित गुप्ता का बयान
क्रिप्टो उद्योग की ओर से CoinDCX के सह-संस्थापक सुमित गुप्ता ने भी सरकार से व्यावहारिक सुधारों की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि भारत में क्रिप्टो निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन मौजूदा कर ढांचा इस विकास में बाधा बन रहा है।
सुमित गुप्ता के अनुसार, यदि सरकार 1 प्रतिशत TDS को घटाकर 0.01 प्रतिशत करे और 30 प्रतिशत कर को आयकर स्लैब से जोड़े, तो इससे क्रिप्टो व्यापार अधिक पारदर्शी होगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में संस्थागत निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जो दर्शाता है कि क्रिप्टो को अब केवल सट्टा नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक निवेश विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर भारत की तुलना
दुनिया के कई देशों में बिटकॉइन और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियों पर आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) को नियामकीय मंजूरी मिल चुकी है। इससे क्रिप्टो बाजार अधिक परिपक्व और सुरक्षित हुआ है। इसके विपरीत, भारत में अभी तक क्रिप्टो ETF, लाइसेंसिंग प्रणाली और निवेशक सुरक्षा ढांचे पर कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई है।
निष्कर्ष
भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर राजनीतिक नेतृत्व और उद्योग जगत दोनों अब स्पष्ट और संतुलित नियमन की मांग कर रहे हैं। राघव चड्ढा की वैधानिकता और सुरक्षा पर आधारित आवाज़ तथा CoinDCX के सुमित गुप्ता की कर सुधार की अपील यह संकेत देती है कि अब नीति में देरी महंगी साबित हो सकती है। सरकारी फैसले तय करेंगे कि भारत डिजिटल परिसंपत्ति अर्थव्यवस्था में नेतृत्व करेगा या अवसर गंवाएगा।
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