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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

अमेरिकी सांसदों का प्रस्ताव: छोटे स्टेबलकॉइन भुगतान और स्टेकिंग पर टैक्स छूट

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में द्विदलीय विधेयक पेश हुआ है, जिसमें $200 तक के स्टेबलकॉइन भुगतान पर टैक्स छूट और स्टेकिंग-माइनिंग रिवॉर्ड पर कर टालने का प्रस्ताव है।

अमेरिकी सांसदों का प्रस्ताव: छोटे स्टेबलकॉइन भुगतान और स्टेकिंग पर टैक्स छूट
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अमेरिकी सांसदों ने क्रिप्टोकरेंसी कर व्यवस्था में बड़े सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसमें स्टेबलकॉइन लेनदेन पर कर में छूट और स्टेकिंग/माइनिंग रिवॉर्ड के लिए आयकर भुगतान में बुनियादी बदलाव शामिल है।

इस पहल का उद्देश्य डिजिटल एसेट को पारंपरिक वित्तीय क्रियाकलापों के समान कर स्थिति देना है और छोटे निवेशकों व रोज़मर्रा के उपयोगकर्ताओं पर टैक्स का बोझ कम करना है।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के दो प्रमुख सांसद - मैक्स मिलर (ओहायो से रिपब्लिकन) और स्टीवन हॉर्सफोर्ड (नेवादा से डेमोक्रेट) - ने डिजिटल एसेट पैरिटी एक्ट नामक एक चर्चा का मसौदा पेश किया है, जो 2025 के बाद टैक्स वर्ष से प्रभावी होने पर कई बदलाव लाने का प्रस्ताव देता है।

स्टेबलकॉइन टैक्स छूट

प्रस्तावित ड्राफ्ट का एक प्रमुख प्रावधान यह है कि नियमित, अमेरिकी डॉलर से जुड़ी स्टेबलकॉइन भुगतान लेनदेन पर $200 तक की राशि टैक्स से मुक्त होगी। इसका मतलब है कि यदि कोई व्यक्ति दैनिक खर्चों के लिए स्टेबलकॉइन का उपयोग करता है, जैसे कि सामान खरीदना, सेवा का भुगतान करना या छोटे शुल्क देना, तो उसे उस लेनदेन पर पूंजीगत लाभ कर नहीं देना होगा, बशर्ते स्टेबलकॉइन अमेरिकी डॉलर से लगभग $1 के आसपास स्थिर रहे और उस पर नियामक मानदंड लागू हों।

यह छूट ‘न्यून मूल्य अधिग्रहण पहचान आवश्यकताओं’ को समाप्त करने के लिए तैयार की गई है, ताकि रोज़मर्रा के उपयोगकर्ता करों की जटिलताओं से बच सकें और क्रिप्टो भुगतान को अधिक व्यावहारिक विकल्प के रूप में अपनाया जा सके।

टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रावधान उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों के बीच क्रिप्टो स्टेबलकॉइन के उपयोग को बढ़ावा दे सकता है, जिससे डिजिटल मुद्रा को भुगतान के एक विश्वसनीय साधन के रूप में अपनाने में मदद मिलेगी।

कर भुगतान में लचीलापन

क्रिप्टोकरेंसी समुदाय में एक पुरानी शिकायत यह रही है कि स्टेकिंग और माइनिंग रिवॉर्ड पर टैक्स नियम जटिल और अस्पष्ट है, क्योंकि वर्तमान में इन रिवॉर्ड को प्राप्त करते ही उन्हें आय के रूप में टैक्सेबल मान लिया जाता है, भले ही उन्हें बाद में बेचा ना गया हो।

परिषद के मसौदे के अनुसार, टैक्सपेयर अब यह विकल्प चुन सकते हैं कि वे इन रिवॉर्ड (स्टेकिंग/माइनिंग) पर टैक्स की पहचान को अगले पाँच वर्षों तक स्थगित कर सकें, ताकि वास्तविक लाभ और उस पर कर की देयता तब निर्धारित हो जब उन्हें बेचा या अन्य रूप में उपयोग किया जाए।

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यह प्रस्ताव ‘फैंटम इनकम’ (वह आय जो अभी तक वास्तविक नकदी में नहीं बदली है) को परिभाषित कर उसे वास्तविक आर्थिक लाभ के आधार पर कर योग्य बनाने की दिशा में एक समझौता प्रदान करता है। इससे निवेशकों को आज मिलने वाली रिवॉर्ड पर तत्काल टैक्स भुगतान से राहत मिलेगी और वे बेहतर वित्तीय योजना बना सकेंगे। 

टैक्स कोड में अन्य सुधार

ड्राफ्ट के अनुसार, अन्य कई तकनीकी टैक्स नियमों को भी क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर लागू करने का प्रस्ताव है। इनमें वॉश सेल नियम, सिक्योरिटीज़ उधार टैक्स ट्रीटमेंट और मार्क-टू-मार्केट विकल्प शामिल हैं, जो डिजिटल एसेट के ट्रेडिंग और निवेश को पारंपरिक वित्तीय एसेट्स के समान टैक्स मानकों के साथ स्थिर करेंगे।

साथ ही, ब्रोकर और डीलर जैसे मध्यस्थों को विशेष नियमों के अधीन रखा जाएगा और ट्रेजरी को एंटी-अब्यूज़ दिशानिर्देश जारी करने का अधिकार भी प्रदान किया जाएगा ताकि टैक्स नियमों के दुरुपयोग को रोका जा सके।

क्रिप्टो इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया और आगे की राह

क्रिप्टो उद्योग समूहों, जैसे ब्लॉकचेन एसोसिएशन ने पहले ही स्टेबलकॉइन रिवॉर्ड और तीसरे पक्ष के प्लेटफॉर्मों के संदर्भ में नियमों पर स्पष्टता की मांग करते हुए बयान जारी किया है कि टैक्स और नियम नवाचार को रोके बिना प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना चाहिए।

हालाँकि यह ड्राफ्ट अभी प्रारंभिक चरण में है और इसे कांग्रेस में कानून बनाने की प्रक्रिया से गुजरना होगा, विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रयास डिजिटल एसेट को कर नीति में शामिल करने का एक बड़ा कदम हो सकता है, जो यूएस को तकनीकी वित्तीय नवाचार में आगे रख सकता है।

निष्कर्ष

अमेरिकी क्रिप्टो कर सुधार प्रस्ताव, विशेष रूप से स्टेबलकॉइन लेनदेन पर टैक्स छूट और स्टेकिंग/माइनिंग रिवॉर्ड में कर पहचान में लचीलापन, से छोटे उपयोगकर्ताओं और निवेशकों को राहत मिल सकती है, जबकि साथ ही क्रिप्टोकरेंसी को वास्तविक आर्थिक लेनदेन के रूप में अपनाने में मदद मिल सकती है। यह पहल डिजिटल अर्थव्यवस्था को व्यापक रूप से शामिल करने और पारंपरिक वित्तीय ढांचे के साथ तालमेल बैठाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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