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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

बजट 2026–27: क्रिप्टो उद्योग के लिए अवसर या निराशा ?

भारत का बजट 2026–27 क्रिप्टो कराधान में बड़े बदलाव नहीं लाया है। मौजूदा 30 % टैक्स और 1 % TDS यथावत है, लेकिन क्रिप्टो रिपोर्टिंग और अनुपालन नियमों को और सख्त किया गया है।

बजट 2026–27: क्रिप्टो उद्योग के लिए अवसर या निराशा ?
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भारत सरकार ने 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए Union Budget 2026–27 में क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) क्षेत्र के लिए कोई मौलिक कर सुधार लागू नहीं किया। बजट में टैक्स ढांचे को बुनियादी रूप से अपरिवर्तित रखा गया - 30 % की दर से पूंजीगत लाभ कर और 1 % की  Tax Deducted at Source (TDS) नियम कायम है, जिसे उद्योग ने पहले ही आलोचना का विषय बनाया हुआ है। इस फैसले ने कई क्रिप्टो एक्सचेंजों और निवेशकों को निराश किया है, जिन्होंने बजट से टैक्स दरों में राहत और नुकसान समायोजन की मांग की थी।

क्रिप्टो उद्योग का मानना है कि जब तक कराधान संरचना में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं किया जाता, भारत का क्रिप्टो व्यापार और नवाचार ऑनशोर (देश के भीतर) नहीं टिक पाएगा। वर्तमान नियमों के तहत निवेशकों के लाभ पर 30 % कर लगा रहता है, और ट्रेडिंग के दौरान हर लेन-देन पर 1 % TDS लागू होना पूंजी को लॉक कर देता है, जिससे तरलता और ऑनशोर गतिविधि पर दबाव बढ़ता है।

मौजूदा टैक्स ढांचा और उसकी चुनौतियाँ

बजट 2026–27 में क्रिप्टो क्षेत्र के लिए सबसे उल्लेखनीय बदलाव अनुपालन नियमों की कड़ी सजा से जुड़ा है। वित्त विधेयक के तहत अब क्रिप्टो एक्सचेंजों और बिचौलियों को ट्रांज़ैक्शन डेटा को टैक्स विभाग को सही और समय पर रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। रिपोर्टिंग में देरी या गलत जानकारी देने पर ₹200 प्रतिदिन का जुर्माना और ₹50,000 तक का दंड लगाया जाएगा।

सरकार का कहना है कि ये उपाय डिजिटल संपत्ति बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे और रिपोर्टिंग के अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भारत को लाने में मदद करेंगे। हालांकि, कई क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और उद्योग विशेषज्ञ इसे अनुचित दबाव मानते हैं जो छोटी और मध्यम प्लेटफॉर्म पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है।

उद्योग की प्रतिक्रिया और मांगें

क्रिप्टो उद्योग ने बजट से पहले ही टैक्स सुधारों के लिए आवाज़ उठाई थी। इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने मांग की थी कि TDS को 1 % से घटाकर लगभग 0.01 % किया जाए, जिससे पूंजी लॉक-इन कम हो और निवेशकों को भारतीय मंचों पर तरलता मिल सके। इसके अलावा, पूंजीगत हानि को लाभ के खिलाफ समायोजित करने की अनुमति देने की भी अपील की गई थी, ताकि निवेशकों पर टैक्स बोझ को वास्तविक लाभ-हानि के अनुरूप बनाया जा सके।

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हालाँकि बजट में इन मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, लेकिन बजट के बाद भी उद्योग ने संकेत दिया है कि वे सरकार के साथ संतुलित और टिकाऊ नीति निर्माण पर काम जारी रखेंगे। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत एक स्थिर और व्यापार-मित्र एसेट टोकन नीति बनाता है, तो यह वित्तीय नवाचार और Web3 सेवाओं के लिए एक बड़ा बाजार बन सकता है।

निवेशकों और बाजार पर प्रभाव

क्रिप्टो निवेशकों ने वर्तमान टैक्स तंत्र को अनुचित बताते हुए ट्रेडिंग को कम कर दिया है, और कुछ मामलों में विदेश आधारित एक्सचेंजों की ओर रुख किया है जहाँ कम टैक्स दरें और अधिक तरलता उपलब्ध है। एक सर्वेक्षण से पता चला है कि निवेशकों का बड़ा हिस्सा 2026 बजट से पहले सुधार की उम्मीद कर रहा था और मौजूदा नियमों को अनुपातहीन मानता है।

निष्कर्ष

संघ बजट 2026–27 ने क्रिप्टो उद्योग के लिए बड़े टैक्स सुधारों को अपने अगले चरण के लिए टाल दिया है, लेकिन अनुपालन और रिपोर्टिंग में सख्ती लाकर नियमों को और स्पष्ट किया है। इसका अर्थ यह है कि सरकार इस क्षेत्र को ट्रैकिंग योग्य और पारदर्शी बनाना चाहती है, लेकिन साथ ही वृद्धि-प्रेरित टैक्स स्ट्रक्चर को संशोधित करने से बच रही है।

इस बजट ने संकेत दिया है कि भारत के क्रिप्टो नियमन का विकास अब टैक्स अनुपालन और डेटा रिपोर्टिंग पर केंद्रित हो गया है, बजाय इसके कि यह क्षेत्र को सीधे बढ़ावा दे। भविष्य में, यदि सरकार टैक्स और नियमन ढांचे को और अधिक व्यापार-अनुकूल बनाती है, तो भारत न केवल घरेलू निवेशकों को प्रेरित कर सकता है बल्कि वैश्विक डिजिटल संपत्ति बाजार में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।

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