आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर भारत के क्रिप्टो निवेशक और डिजिटल संपत्ति से जुड़े उद्योग के हितधारक उम्मीदों से भरे हैं। पिछले वर्षों में क्रिप्टोकरेंसी पर लागू फ्लैट 30% टैक्स, 1% लेन-देन पर टैक्स कटौती (टीडीएस) तथा नियमों की अस्पष्टता ने बाजार में निवेशकों के हौंसले को प्रभावित किया है। उद्योग मानता है कि इस बार बजट में कर और नियामक ढांचे में बदलाव से बाजार की तरलता बढ़ सकती है और घरेलू प्रतिभागियों को मजबूत समर्थन मिल सकता है।
सुमित गुप्ता, सह-संस्थापक, CoinDCX (कॉइनडीसीएक्स), का मनाना है कि
जैसे-जैसे बजट 2026 नज़दीक आ रहा है, वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्ति क्षेत्र स्वाभाविक रूप से कुछ राहत की अपेक्षा कर रहा है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि मौजूदा कर व्यवस्था को लागू हुए लगभग चार वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस समय लिए गए निर्णय नवाचार को तेज़ गति दे सकते हैं और भारत को वैश्विक वेब-3 तथा डिजिटल परिसंपत्ति नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करने में सहायक हो सकते हैं।
भारत में क्रिप्टो टैक्स कानून
वर्तमान में भारत में क्रिप्टो को ‘वर्चुअल डिजिटल एसेट’ (VDA) के रूप में टैक्स कानून में माना जाता है। इस पर किसी भी लाभ पर 30 % टैक्स लगता है और टीडीएस के अलावा नुकसान के सेट-ऑफ की अनुमति नहीं है। इसका सीधा प्रभाव यह है कि ट्रेडिंग के समय निवेशक अपने घाटे को लाभ से समायोजित नहीं कर सकते, जिससे वास्तविक आर्थिक परिणाम पर टैक्स अधिक लगता है।
क्रिप्टो उद्योग की प्रमुख मांग है कि 1 % टीडीएस को कम कर 0.01 % या 0.1 % किया जाए, ताकि घरेलू एक्सचेंजों पर तरलता बनी रहे और निवेशक विदेशी प्लेटफॉर्म पर न चले जाएँ। साथ ही अधिकांश विशेषज्ञ चाहते हैं कि 30 % टैक्स को पारंपरिक आयकर स्लैब से जोड़ा जाए, जिससे छोटे और मध्यम निवेशकों को लाभ हो सके।
विदेशी प्लेटफॉर्म की ओर पलायन
मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर के बारे में CoinDCX सह-संस्थापक सुमित गुप्ता ने कहा कि “टीडीएस को 1 प्रतिशत से घटाकर 0.01 प्रतिशत करने से निगरानी बनी रहेगी, जबकि विदेशी प्लेटफॉर्म की ओर पलायन का मुख्य प्रोत्साहन समाप्त होगा। इससे उपयोगकर्ताओं को भारतीय मंचों पर लौटने के लिए बढ़ावा मिलेगा और सरकारी निगरानी के अंतर्गत लेन-देन की पारदर्शिता फिर से स्थापित होगी।“
इसके साथ ही, 30 प्रतिशत पूंजीगत लाभ कर को आयकर स्लैब के अनुरूप करने तथा वेब-3 आधारित उद्यमों के लिए नुकसान की भरपाई (लॉस ऑफसेट) और मानक व्यावसायिक कटौतियों की अनुमति देने से एक ऐसा स्थिर, पारदर्शी और भविष्य-उन्मुख पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जा सकता है, जो भारत में जिम्मेदार नवाचार को सशक्त समर्थन दे।
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नुकसान को भविष्य के लाभ से सेट-ऑफ करने की अनुमति
इसके अलावा, उद्योग यह भी चाहता है कि क्रिप्टो निवेश में हुए नुकसान को भविष्य के लाभ से सेट-ऑफ करने की अनुमति दी जाए, जैसा कि शेयर बाजार के अन्य निवेशों में होता है। इससे एक संतुलित और न्यूनतम जोखिम वाली निवेश-संरचना विकसित हो सकती है, जिससे निवेशकों को बाजार में स्थिरता मिल सके।
न्यायिक और नियामक स्तर पर भी क्रिप्टो कारोबारियों की मांगें हैं। उद्योग का मानना है कि सेबी तथा आरबीआई जैसे संस्थानों के साथ एक स्पष्ट नियामक ढांचा विकसित होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा। इससे न केवल निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की क्रिप्टोनीति को मजबूती मिलेगी।
आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि बजट में 1 % टीडीएस में कटौती, 30 % टैक्स का पुनर्निर्धारण और नुकसान के सेट-ऑफ की सुविधा दी जाती है, तो भारत के क्रिप्टो बाजार का आकार और घरेलू कारोबार बढ़ सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वर्षों में सैंकड़ों हजार करोड़ रुपये के कारोबार को भारतीय प्लेटफॉर्म पर वापस लाया जा सकता है, जिससे कर संग्रह में भी वृद्धि होगी और निवेशकों का भरोसा भी स्थापित होगा।
अभी तक स्पष्ट संकेत नहीं
हालाँकि, सरकार और रिज़र्व बैंक की ओर से अभी तक स्पष्ट संकेत नहीं मिल पाए हैं कि 30 % टैक्स में कटौती होगी या नहीं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड और रिज़र्व बैंक ने वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों को लेकर अपनी चिंताओं को व्यक्त किया है, विशेष रूप से वित्तीय सुरक्षा और धोखाधड़ी के जोखिम के कारण। इससे यह संकेत मिलता है कि टैक्स छूट की संभावना पूरी तरह सुरक्षित नहीं है, लेकिन शायद कुछ नियामक स्पष्टता और निवेश-अनुकूल प्रावधान बजट में शामिल किये जा सकते हैं।
क्रिप्टो निवेशकों और उद्योग के लिए यह बजट एक निर्णायक मोड़ हो सकता है, क्योंकि इससे न केवल निवेशकों को राहत मिल सकती है बल्कि भारत के डिजिटल और वेब3 इकोसिस्टम को भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी। निवेशक इस बजट को इसलिए भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि इससे देश में डिजिटल संपत्तियों के लिए एक स्थिर और पारदर्शी नीति-ढांचा उभर सकता है।
निष्कर्ष
बजट 2026-27 क्रिप्टो निवेश के लिए एक नई दिशा निर्धारित कर सकता है। टैक्स के पुनर्निरीक्षण, टीडीएस में कमी, नुकसान सेट-ऑफ की अनुमति तथा स्पष्ट नियामक ढाँचे जैसी मांगें यदि शामिल होती हैं तो निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और घरेलू क्रिप्टो बाजार को मजबूती मिलेगी।
दूसरी ओर, यदि मौजूदा कर नियमों में व्यापक बदलाव नहीं होता है, तो निवेशक अपेक्षाओं के अनुरूप राहत नहीं पा सकेंगे और विदेशी प्लेटफॉर्म पर निवेश का रुझान बना रह सकता है। ऐसे में सरकार की अंतिम घोषणा से ही यह स्पष्ट होगा कि बजट क्रिप्टो बाजार को कितनी परिपक्वता और प्रोत्साहन प्रदान कर पाता है।
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