क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन तकनीक को लेकर भारत का रुख पिछले कुछ वर्षों में काफी मिश्रित और सतर्क रहा है। जबकि युवा निवेशकों तथा तकनीकी समुदाय के एक हिस्से ने डिजिटल संपत्तियों को क्रांतिकारी वित्तीय साधन के रूप में अपनाया है, वहीं नीति निर्माताओं की चिंता वित्तीय स्थिरता, धनशोधन और निवेशकों के संरक्षण के मुद्दों पर अधिक केंद्रित रही है। इसीलिए 2026-27 के केंद्रीय बजट से बहुत बड़े बदलाव की उम्मीद करना अभी प्रीमेच्योर ही माना जा रहा है।
संतुलन बनाम जोखिम
भारत ने क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मुद्रा के रूप में मान्यता नहीं दी है, लेकिन इसे ‘वर्चुअल डिजिटल असेट’ (VDA) के रूप में कराधान और निगरानी के दायरे में ले लिया है। वर्तमान व्यवस्था के तहत क्रिप्टो से होने वाली आय पर 30% टैक्स है और लेनदेन पर 1% TDS लागू है। निवेशक और व्यापारी इसे अन्य संपत्ति वर्गों की तुलना में कठोर कर नीति मानते हैं, जो बाजार सहभागिता को कम कर देती है।
नवंबर 2025 में एक सर्वे में पता चला कि लगभग 66% निवेशक मौजूदा कर व्यवस्था को अनुचित मानते हैं और वे चाहते हैं कि बजट 2026 में कर दरों में समायोजन हो, साथ ही लाभ-हानि का सेट-ऑफ और TDS में कमी की सुविधा दी जाए। इससे न सिर्फ निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि ऑनशोर बाजार की तरलता में भी सुधार होगा, जिससे घरेलू प्लेटफॉर्म मजबूत हो सकते हैं।
बजट से चार अपेक्षाएँ
युवा निवेशकों तथा तकनीकी समुदाय के एक हिस्से ने डिजिटल संपत्तियों को क्रांतिकारी वित्तीय साधन के रूप में अपनाया है, वहीं नीति निर्माताओं की चिंता वित्तीय स्थिरता, धनशोधन और निवेशकों के संरक्षण के मुद्दों पर अधिक केंद्रित रही है।
1. नियामक स्पष्टता: क्रिप्टो उद्योग चाहता है कि सरकार डिजिटल एसेट्स के लिए एक स्पष्ट, सुव्यवस्थित नियामक ढांचा पेश करे। यह ढांचा निवेशकों, एक्सचेंजों और डेवलपर्स के लिए निश्चित दिशानिर्देश प्रदान करेगा और अवांछित गतिविधियों के खिलाफ बल प्रदान करेगा।
2. कर संरचना में सुधार: वर्तमान 1% TDS को छोटे-मध्यम निवेशकों के लिए और अधिक उपयुक्त स्तर पर लाया जाना चाहिए, ताकि निवेशकों के हाथ में अधिक पैसा रहे और वे बाजार में सक्रिय रहें। साथ ही, 30% कर दर को भी अन्य परिसंपत्ति वर्गों के अनुरूप तुलनात्मक रूप से संतुलित करना जरूरी बताया जा रहा है।
3. नवाचार और ब्लॉकचेन को बढ़ावा: भारतीय उद्योग और तकनीक कंपनियों का मानना है कि ब्लॉकचेन तकनीक में निवेश को बढ़ावा देना चाहिए। इससे भारत Web3 और ब्लॉकचेन आधारित नवाचारों में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर हो सकता है।
4. स्थिरता बनाम जोखिम: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सहित कई नीति नियामक संस्थाएँ क्रिप्टो को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। उनका मानना है कि बिना नियंत्रण के डिजिटल एसेट्स वित्तीय स्थिरता और मौद्रिक नीति को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए सरकार साधारण क्रिप्टो को वित्तीय ढांचे में शामिल करने में जल्दबाजी नहीं कर रही है।
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वैश्विक संदर्भ और भारत
कुछ वैश्विक अर्थव्यवस्थाएँ जैसे अमेरिका, यूरोप और सिंगापुर ने क्रिप्टो के लिए अलग-थलग, जोखिम-समायोजित नियम बनाए हैं, जिससे निवेशकों और संस्थागत निवेश को आकर्षित किया जा रहा है। भारत में भी इसी तरह की गतिशीलता की मांग होती रही है, लेकिन सरकार अभी तक पूर्ण रूप से ऐसा कदम उठाने को तैयार नहीं है। क्रिप्टो को पूर्ण रूप से मुख्यधारा में लाने की बजाय, सरकार बेहतर निगरानी और कर व्यवस्था पर अधिक ज़ोर दे रही है।
साथ ही, RBI डिजिटल रूप से जारी की गई केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) को BRICS देशों के साथ जोड़ने जैसे अंतरराष्ट्रीय पहलों पर काम कर रहा है, जो पारंपरिक क्रिप्टो की तुलना में अधिक नियंत्रित और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है।
निवेशकों और उद्योग का रुख
क्रिप्टो निवेशक और उद्योग विशेषज्ञ इस बजट को एक परीक्षण के रूप में देख रहे हैं। वे चाहते हैं कि सरकार स्पष्टता के साथ एक संतुलित नीतिगत ढांचा पेश करे ताकि भारत का क्रिप्टो इकोसिस्टम न सिर्फ सुरक्षित रहे, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी शामिल हो सके।
निवेशकों का मानना है कि वर्तमान टैक्स और अनुपालन नियम नवाचार को सीमित कर रहे हैं और सतही निवेश के बजाय दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित नहीं कर रहे हैं।
निष्कर्ष
भारत के क्रिप्टो पर रुख को अभी भी पूर्ण समर्थन या प्रतिबंधात्मक नीति के बीच संतुलन खोजते देखा जा रहा है। बजट 2026-27 से बड़ी घोषणाओं की अपेक्षा सीमित हो सकती है, लेकिन स्पष्ट नियामक दिशा, कर सुधार और ब्लॉकचेन-प्रेरित नवाचार को बढ़ावा देने में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
यदि सरकार उद्योग की मांगों को ध्यान में रखकर व्यावहारिक सुधार करती है, तो भारत का डिजिटल एसेट इकोसिस्टम और वित्तीय स्थिरता दोनों को सशक्त बनाया जा सकता है।
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