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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

बजट 2026: क्रिप्टो संपत्तियों पर कर ढांचा जस का तस, रिपोर्टिंग में चूक पर ₹50,000 तक जुर्माना

संघीय बजट 2026-27 में सरकार ने क्रिप्टो संपत्तियों से जुड़े कर और स्रोत पर कर कटौती नियमों में कोई राहत नहीं दी है।

बजट 2026: क्रिप्टो संपत्तियों पर कर ढांचा जस का तस, रिपोर्टिंग में चूक पर ₹50,000 तक जुर्माना
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संघीय बजट 2026-27 में सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी यानी आभासी डिजिटल संपत्तियों से जुड़े कर नियमों को लेकर निवेशकों को किसी तरह की राहत नहीं दी है। बजट प्रस्तावों के अनुसार, क्रिप्टो से होने वाली आय पर लागू 30 प्रतिशत कर और प्रत्येक लेन-देन पर 1 प्रतिशत स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। हालांकि, सरकार ने अब रिपोर्टिंग में चूक और गलत जानकारी देने पर सख्त दंडात्मक प्रावधान जोड़ दिए हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में स्पष्ट किया कि सरकार का जोर अब कर संग्रह के साथ-साथ अनुपालन और पारदर्शिता बढ़ाने पर है। इसी क्रम में आयकर कानून में संशोधन करते हुए क्रिप्टो लेन-देनों की सूचना समय पर और सही तरीके से न देने पर जुर्माना लगाने का प्रस्ताव किया गया है। ये प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।

कर नियमों में कोई बदलाव नहीं

बजट दस्तावेजों के अनुसार, क्रिप्टो संपत्तियों की बिक्री या हस्तांतरण से होने वाले लाभ पर 30 प्रतिशत की दर से कर लगाया जाएगा। इसके अलावा, प्रत्येक लेन-देन पर 1 प्रतिशत टीडीएस की कटौती अनिवार्य रहेगी। सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि क्रिप्टो कारोबार में हुए नुकसान को न तो अन्य आय से समायोजित किया जा सकता है और न ही अगले वर्षों में आगे बढ़ाया जा सकता है।

इस प्रावधान का सीधा असर उन निवेशकों पर पड़ता है, जो नियमित रूप से क्रिप्टो बाजार में खरीद-फरोख्त करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंची कर दर और नुकसान समायोजन की अनुमति न होने से छोटे और मध्यम निवेशकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

रिपोर्टिंग में चूक पर सख्ती

बजट 2026 का सबसे अहम बदलाव रिपोर्टिंग से जुड़े दंड प्रावधान माने जा रहे हैं। नए नियमों के तहत यदि कोई व्यक्ति, संस्था या मंच निर्धारित समयसीमा में क्रिप्टो लेन-देनों का विवरण आयकर विभाग को नहीं देता है, तो उस पर प्रति दिन 200 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

वहीं, यदि कोई गलत जानकारी दी जाती है या सुधार के लिए जारी नोटिस के बावजूद विवरण को ठीक नहीं किया जाता, तो 50,000 रुपये तक का स्थायी जुर्माना लगाया जाएगा। यह दंड प्रावधान क्रिप्टो विनिमय मंचों, डिजिटल बटुआ सेवाओं और अन्य मध्यस्थों पर भी लागू होंगे। सरकार का मानना है कि इससे क्रिप्टो लेन-देनों पर निगरानी मजबूत होगी और कर चोरी की संभावनाओं पर अंकुश लगेगा।

उद्योग और निवेशकों की प्रतिक्रिया

क्रिप्टो उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने बजट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। उद्योग जगत का कहना है कि कर ढांचे में किसी भी तरह की राहत न मिलने से बाजार में निराशा है। कई जानकारों का मानना है कि ऊंची टीडीएस दर के कारण बाजार में नकदी प्रवाह प्रभावित होता है और कारोबार की गति धीमी पड़ती है।

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हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि रिपोर्टिंग से जुड़े सख्त नियमों से क्षेत्र में अनुशासन आएगा और क्रिप्टो बाजार को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था के करीब लाने में मदद मिलेगी।

निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है बजट

कर विशेषज्ञों के अनुसार, क्रिप्टो संपत्तियों से जुड़ी आय तब कर योग्य मानी जाती है, जब उसे रुपये में बदला जाए या किसी वस्तु अथवा सेवा के भुगतान में इस्तेमाल किया जाए। प्रत्येक लेन-देन पर टीडीएस कटने से खासतौर पर सक्रिय निवेशकों की तरलता पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही, अब रिपोर्टिंग में किसी भी तरह की लापरवाही सीधे आर्थिक दंड का कारण बन सकती है, इसलिए निवेशकों और मंचों दोनों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।

निष्कर्ष

संघीय बजट 2026-27 में सरकार ने क्रिप्टो संपत्तियों पर कर और स्रोत पर कर कटौती की मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखते हुए अनुपालन को और सख्त बना दिया है। जहां एक ओर निवेशकों को कर राहत की उम्मीदों पर पानी फिरा है, वहीं दूसरी ओर नई दंड व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ने की संभावना है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार भविष्य में क्रिप्टो क्षेत्र के लिए संतुलित और विकासोन्मुख नीति पर विचार करती है या नहीं।

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