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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

हैदराबाद में 19 करोड़ की डिजिटल मुद्रा की ठगी, तीन आरोपी गिरफ्तार

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में नकली पहचान सत्यापन जाल बनाकर एक व्यापारी से लगभग 19 करोड़ रुपये की डिजिटल मुद्रा ठगने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

हैदराबाद में 19 करोड़ की डिजिटल मुद्रा की ठगी, तीन आरोपी गिरफ्तार
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तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में डिजिटल मुद्रा से जुड़ी एक बड़ी साइबर ठगी का खुलासा हुआ है, जिसमें नकली पहचान सत्यापन जाल के माध्यम से लगभग 19 करोड़ रुपये की डिजिटल संपत्ति हड़प ली गई। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

यह घटना न केवल भारत में बढ़ते साइबर अपराधों की गंभीरता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर डिजिटल वित्तीय प्रणालियों के सामने खड़ी नई चुनौतियों की भी पुष्टि करती है, क्योंकि डिजिटल मुद्रा का लेन-देन भौगोलिक सीमाओं से परे संचालित होता है।

आरोपियों ने खुद को डिजिटल मुद्रा खरीदने वाला ग्राहक बताया

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने खुद को डिजिटल मुद्रा खरीदने वाला ग्राहक बताकर 44 वर्षीय व्यापारी से संपर्क किया। विश्वास जीतने के बाद उन्होंने व्यापारी को पहचान सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर एक ट्रैप लिंक भेजा। 

जैसे ही व्यापारी ने वहां आवश्यक जानकारी दी, एक छिपी हुई तकनीकी प्रक्रिया सक्रिय हो गई और उसके डिजिटल बटुए से लगभग 21 लाख से अधिक इकाई डिजिटल मुद्रा, जिसकी कीमत करीब 19 करोड़ रुपये थी, आरोपियों के नियंत्रण में चली गई। 

विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की ठगी में अपराधी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित तकनीकों का उपयोग करते हैं, जिससे चोरी की गई संपत्ति को विभिन्न डिजिटल माध्यमों के जरिए तेजी से स्थानांतरित कर दिया जाता है, जिससे उसका पता लगाना कठिन हो जाता है।

अत्यंत सुनियोजित तरीके से तैयार किया गया था ट्रैप

जांच में सामने आया कि यह जाल अत्यंत सुनियोजित तरीके से तैयार किया गया था। आरोपियों में से एक ने नकली जाल स्थल तैयार किया था, जबकि अन्य ने व्यापारी से संपर्क कर उसे भ्रमित किया। पुलिस ने मुख्य आरोपी को हैदराबाद और दूसरे आरोपी को पुणे से गिरफ्तार किया, जबकि जाल स्थल तैयार करने वाले तीसरे आरोपी को जयपुर से पकड़ा गया।

आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन और दो संगणक भी जब्त किए गए हैं, जिनका उपयोग इस अपराध में किया गया था। जांच एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस गिरोह के तार अन्य देशों में सक्रिय साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, क्योंकि वैश्विक स्तर पर ऐसे संगठित गिरोह डिजिटल मुद्रा को निशाना बना रहे हैं।

व्यापारी को ठगी का एहसास

व्यापारी को ठगी का एहसास तब हुआ जब रकम स्थानांतरित होने के बाद आरोपी अचानक संपर्क से बाहर हो गए। इसके बाद पीड़ित ने साइबर अपराध शाखा में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने डिजिटल प्रमाणों और तकनीकी सुरागों के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई।

फिलहाल पुलिस इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है और चोरी गई डिजिटल मुद्रा की बरामदगी के लिए संबंधित मंचों और अन्य एजेंसियों से संपर्क किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में कई बार अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि डिजिटल संपत्ति का प्रवाह विभिन्न देशों के माध्यम से किया जाता है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के मामलों में अपराधी नकली जाल स्थल बनाकर लोगों की गोपनीय जानकारी प्राप्त करते हैं और तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से उनकी संपत्ति अपने नियंत्रण में ले लेते हैं।

भारत सरकार और विभिन्न एजेंसियां लगातार साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान चला रही हैं, वहीं वैश्विक स्तर पर भी कई देशों ने डिजिटल वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए सख्त नियम और निगरानी तंत्र विकसित किए हैं। इसके बावजूद तकनीकी विकास के साथ-साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी अधिक जटिल और संगठित होते जा रहे हैं।

साइबर अपराधों का जोखिम

भारत में डिजिटल माध्यमों और डिजिटल भुगतान प्रणालियों के तेजी से विस्तार ने आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों का जोखिम भी बढ़ा है।

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, डिजिटल मुद्रा से संबंधित धोखाधड़ी के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल राष्ट्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौती बन चुकी है।

भारत जैसे तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए यह आवश्यक हो गया है कि सुरक्षा उपायों को और अधिक मजबूत किया जाए तथा लोगों को जागरूक बनाया जाए। पुलिस का कहना है कि तकनीकी सावधानी, जागरूकता और सत्यापित मंचों का उपयोग ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

निष्कर्ष

हैदराबाद की यह घटना स्पष्ट संकेत देती है कि साइबर अपराध अब स्थानीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह एक राष्ट्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौती बन चुका है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के इस दौर में जहां अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं जोखिम भी समान रूप से बढ़े हैं।

इसलिए डिजिटल संपत्ति रखने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, केवल प्रमाणित और सुरक्षित मंचों का उपयोग करना चाहिए और किसी भी संदिग्ध पहचान सत्यापन प्रक्रिया या अज्ञात संपर्क पर विश्वास करने से बचना चाहिए। जागरूकता, मजबूत कानून और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही इस उभरते खतरे से प्रभावी मुकाबले की कुंजी है।

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