केंद्र सरकार ने बजट 2026–27 में डिजिटल संपत्तियों, विशेषकर क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेन-देनों की रिपोर्टिंग व्यवस्था को और अधिक कठोर बनाते हुए बड़ा कदम उठाया है। सरकार का उद्देश्य गलत रिपोर्टिंग, जानकारी छिपाने और कर-चोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। नए प्रावधानों के तहत रिपोर्टिंग में चूक या भ्रामक जानकारी देने पर अब स्पष्ट दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आयकर कानून में प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर क्रिप्टो लेन-देनों की जानकारी साझा नहीं की जाती है, तो ₹200 प्रतिदिन का जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं, गलत, अधूरी या भ्रामक जानकारी देने पर ₹50,000 तक का स्थायी दंड निर्धारित किया गया है।
रिपोर्टिंग प्रणाली की खामियों पर सरकार की नजर
सरकार का मानना है कि क्रिप्टो परिसंपत्तियों में बढ़ते निवेश और लेन-देनों के बावजूद रिपोर्टिंग प्रणाली में कई खामियां बनी हुई हैं। इन खामियों का लाभ उठाकर कर-चोरी और आय छिपाने के मामले सामने आए हैं। ऐसे में यह सख्ती डिजिटल संपत्तियों को औपचारिक वित्तीय ढांचे में लाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
मध्यस्थ संस्थाओं पर बढ़ी जिम्मेदारी
नए नियमों के तहत क्रिप्टो एक्सचेंज, डिजिटल वॉलेट सेवा प्रदाता और अन्य मध्यस्थ संस्थाओं को सभी लेन-देनों का सटीक, पूर्ण और समयबद्ध विवरण सरकार को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी और इसके उल्लंघन पर प्रत्यक्ष वित्तीय दंड लगाया जा सकेगा।
उद्योग की प्रतिक्रिया
प्रमुख भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंज CoinDCX के सह-संस्थापक सुमित गुप्ता ने बजट प्रावधानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
बजट 2026–27 में क्रिप्टो मंचों के लिए लेन-देनों की रिपोर्टिंग में चूक पर अनुपालन को और मजबूत करने का प्रस्ताव किया गया है। इसका उद्देश्य डिजिटल संपत्तियों में कर-चोरी पर रोक लगाना है। इससे एक्सचेंजों को अपनी रिपोर्टिंग और अनुपालन प्रणालियों को और सशक्त बनाना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग नीति-निर्माताओं के साथ मिलकर एक सुरक्षित, नवाचार-आधारित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डिजिटल परिसंपत्ति पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
कर दरों में कोई बदलाव नहीं
गौरतलब है कि क्रिप्टोकरेंसी से होने वाली आय पर 30% टैक्स और प्रत्येक लेन-देन पर 1% TDS पहले से ही लागू है। बजट 2026–27 में इन दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार फिलहाल कर दरों में राहत देने के बजाय अनुपालन, निगरानी और पारदर्शिता पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है।
पारदर्शिता बनाम दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार, इन सख्त प्रावधानों से क्रिप्टो बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और कर प्रशासन को बेहतर डेटा उपलब्ध होगा। इससे अवैध गतिविधियों पर अंकुश लग सकता है।
हालांकि, कुछ उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक सख्ती से छोटे निवेशकों और शुरुआती चरण की कंपनियों पर अनुपालन का बोझ बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
बजट 2026-27 में क्रिप्टो लेन-देनों की रिपोर्टिंग को लेकर किए गए सख्त प्रावधान सरकार के उस इरादे को दर्शाते हैं, जिसमें पारदर्शिता, कर-अनुपालन और वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी गई है। आने वाले समय में इन नियमों से डिजिटल संपत्तियों का बाजार अधिक संगठित और भरोसेमंद बनने की उम्मीद है।
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