Cointelegraph
Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रत्यक्ष कर प्रस्तावों के अंतर्गत दंड और अभियोजन व्यवस्था को युक्तिसंगत बनाने की घोषणा की गई है।

केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रत्यक्ष कर प्रस्तावों के अंतर्गत दंड और अभियोजन व्यवस्था को युक्तिसंगत बनाने की घोषणा की गई है।

केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रत्यक्ष कर प्रस्तावों के अंतर्गत दंड और अभियोजन व्यवस्था को युक्तिसंगत बनाने की घोषणा की गई है।
ताज़ा ख़बर

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत करते हुए प्रत्यक्ष कर प्रणाली में व्यापक सुधारों की घोषणा की। इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य करदाताओं पर अनावश्यक दंड और अभियोजन का बोझ कम करना, कर प्रशासन को सरल बनाना तथा विश्वास-आधारित कर व्यवस्था को मजबूत करना है। बजट में कर-निर्धारण, दंड और अभियोजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

कर-निर्धारण और दंड

वित्त मंत्री ने कर-निर्धारण और दंड कार्यवाहियों को एकीकृत करने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत एक सामान्य आदेश के माध्यम से दोनों प्रक्रियाओं को साथ जोड़ा जाएगा, जिससे एक ही विषय पर बार-बार अलग-अलग कार्यवाही से बचा जा सके। इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि करदाताओं के लिए अनुपालन भी सरल होगा। यह कदम विशेष रूप से छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए राहत लेकर आने वाला माना जा रहा है।

अपील प्रक्रिया

बजट में अपील प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। प्रथम अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील लंबित रहने की अवधि के दौरान दंड राशि पर कोई ब्याज देय नहीं होगा, चाहे अपील के निष्कर्ष में कितना भी समय लगे। इसके साथ ही पूर्व भुगतान की अनिवार्य सीमा को बीस प्रतिशत से घटाकर दस प्रतिशत कर दिया गया है, जिसकी गणना केवल मुख्य कर मांग पर की जाएगी। यह प्रावधान करदाताओं के नकदी प्रवाह पर पड़ने वाले दबाव को कम करेगा।

मुकदमेबाजी घटाने के उपाय

मुकदमेबाजी घटाने के उद्देश्य से वित्त मंत्री ने एक और महत्वपूर्ण उपाय की घोषणा की। इसके तहत करदाता पुनर्निधारण कार्यवाहियों के बाद भी संबंधित वर्ष की विवरणी को अद्यतन कर सकेंगे, बशर्ते वे लागू दर के अतिरिक्त दस प्रतिशत कर का भुगतान करें। इसके बाद कर-निर्धारण अधिकारी अपनी आगे की कार्यवाही में केवल इसी अद्यतन विवरणी का उपयोग करेंगे। इससे लंबी कानूनी प्रक्रियाओं और अनिश्चितता में कमी आने की उम्मीद है।

क्या आप जानते हैं: बिटकॉइन टॉप 10 वैश्विक संपत्तियों से बाहर, भारी गिरावट वजह बनी

कम कर की सूचना देने के मामलों में पहले से मौजूद दंड और अभियोजन से सुरक्षा के ढांचे को अब गलत सूचना देने के मामलों में भी लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, ऐसे मामलों में करदाता को देय कर और ब्याज के अतिरिक्त, अतिरिक्त आयकर के रूप में कर राशि के सौ प्रतिशत के बराबर भुगतान करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे जानबूझकर की गई चूक और अनजाने में हुई त्रुटियों के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित होगा।

दंड को शुल्क में परिवर्तित किया जाएगा

तकनीकी त्रुटियों के मामलों में भी राहत की घोषणा की गई है। खातों की लेखापरीक्षा न कराने, अंतरण मूल्य निर्धारण लेखापरीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत न करने तथा वित्तीय लेन-देन से संबंधित विवरण देने में चूक जैसे मामलों में दंड को अब शुल्क में परिवर्तित किया जाएगा। इससे ईमानदार करदाताओं को कठोर दंड से बचाया जा सकेगा और अनुपालन को प्रोत्साहन मिलेगा।

अभियोजन ढांचे में सुधार करते हुए वित्त मंत्री ने गंभीर अपराधों पर नियंत्रण और करदाताओं को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाने के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया। लेखा बही खातों और दस्तावेज प्रस्तुत न करने तथा वस्तु रूप में भुगतान के मामलों में कर कटौती का भुगतान न करना अब अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा। छोटे अपराधों के लिए केवल जुर्माने का प्रावधान होगा, जबकि अन्य अभियोजनों को अपराध की गंभीरता के अनुसार वर्गीकृत किया जाएगा। अधिकतम कारावास की अवधि को घटाकर दो वर्ष किया गया है और न्यायालयों को इसे जुर्माने में परिवर्तित करने की शक्ति दी जाएगी।

विदेशी परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों में राहत

बजट में एक महत्वपूर्ण राहत विदेशी परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों में दी गई है। पुराने प्रभाव के साथ एक अक्टूबर 2024 से, बीस लाख रुपये से कम के सकल मूल्य वाली अचल विदेशी परिसंपत्ति को घोषित न किए जाने पर फिलहाल कोई दंड नहीं लगेगा। ऐसे मामलों में अभियोजन से सुरक्षा प्रदान करने का भी प्रस्ताव किया गया है, जिससे छोटे करदाताओं में भय की भावना कम होगी।

निष्कर्ष

केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रत्यक्ष कर सुधारों के माध्यम से सरकार ने कर प्रशासन को अधिक मानवीय, सरल और विश्वास-आधारित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। दंड और अभियोजन व्यवस्था के युक्तिसंगतीकरण से न केवल मुकदमेबाजी में कमी आएगी, बल्कि करदाताओं का भरोसा भी मजबूत होगा, जो दीर्घकाल में आर्थिक विकास और अनुपालन संस्कृति को बढ़ावा देगा।

ऐसी ही और ख़बरों और क्रिप्टो विश्लेषण के लिए हमें X पर फ़ॉलो करें, ताकि कोई भी अपडेट आपसे न छूटे!

Cointelegraph स्वतंत्र और पारदर्शी पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्ध है। यह समाचार लेख Cointelegraph की संपादकीय नीति के अनुरूप तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य सटीक तथा समय पर जानकारी प्रदान करना है। पाठकों को जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हमारी संपादकीय नीति पढ़ें https://in.cointelegraph.com/editorial-policy