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Rajeev Ranjan Roy
लेखक: Rajeev Ranjan Royस्टाफ लेखक
Pratik Bhuyan
Pratik Bhuyan द्वारा समीक्षितस्टाफ संपादक

क्रिप्टो पर भारत की सख्ती, सुरक्षा मजबूत लेकिन प्राइवेसी सवालों में

भारत सरकार और FIU-IND ने क्रिप्टो बाजार मे पारदर्शिता, सुरक्षा व वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु सख्त नियम लागू किए हैं। नए उपायों से निवेशकों की गोपनीयता और धोखाधड़ी रोकथाम दोनों को महत्व मिलेगा।

क्रिप्टो पर भारत की सख्ती, सुरक्षा मजबूत लेकिन प्राइवेसी सवालों में
Regulations

भारत में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े नियमों को और अधिक कड़ा किया जा रहा है, ताकि वित्तीय पारदर्शिता के साथ डिजिटल डेटा गोपनीयता भी सुनिश्चित किया जा सके। वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) तथा अन्य नियामक संस्थाओं द्वारा जारी किए गए नए दिशानिर्देशों के तहत क्रिप्टो विनिमय प्लेटफार्मों के लिए कई महत्त्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनसे बाजार की जवाबदेही एवं जोखिम नियंत्रण में मजबूती आएगी।

विस्तृत KYC प्रक्रिया

सबसे पहले, अब किसी भी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर खाता खोलने या ट्रेडिंग शुरू करने के लिए निवेशकों को लाइव सेल्फी, जियो-डाटा (स्थान पहचान) सहित विस्तृत ‘अपने ग्राहक को जानो’ (KYC) प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इससे नकली खातों और धोखाधड़ी की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

एफआईयू-आईएनडी (FIU-IND) ने न केवल केवाईसी (KYC) नियम कड़े किए हैं, बल्कि साइबर सुरक्षा ऑडिट को भी अनिवार्य कर दिया है। अब सभी क्रिप्टो एक्सचेंजों को CERT-In द्वारा मान्यता प्राप्त ऑडिटर से प्रतिवर्ष सुरक्षा जांच करवानी होगी। इसका उद्देश्य प्लेटफॉर्म की तकनीकी मजबूती सुनिश्चित करना, हैकिंग व डेटा उल्लंघन के जोखिम को रोकना है।

व्यापक लक्ष्य

इन नियमों का एक व्यापक लक्ष्य वित्तीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकवादी गतिविधियों के लिए क्रिप्टो नेटवर्क का उपयोग रोकना भी है। निवेशकों के डेटा को सुरक्षित रखना और वित्तीय प्रणाली की अखंडता बनाये रखना सरकार और नियामकों की प्राथमिकता रही है। FIU-IND के अनुसार, पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए सभी रिपोर्टिंग संस्थाओं को अपनी नीतियों को अपनी वेबसाइट और ऐप पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना आवश्यक होगा, ताकि उपयोगकर्ताओं को नियमों के बारे में संपूर्ण जानकारी मिल सके। 

व्यक्तिगत डेटा की रक्षा

नए नियम DPDP (डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम) के अनुरूप भी हैं। ये नियम भारतीय यूजर्स के व्यक्तिगत डेटा की रक्षा हेतु डिज़ाइन किए गए हैं और यूरोपीय संघ के GDPR जैसे ढांचे से प्रेरणा लेते हैं। क्रिप्टो प्लेटफॉर्म अब व्यापक डेटा संग्रह के बजाय केवल आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे तथा डेटा गोपनीयता को प्राथमिकता देंगे। इससे उपयोगकर्ता की पहचान और लेन-देन वैधता को सुनिश्चित करने के दौरान गोपनीयता का उल्लंघन नहीं होगा। 

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विश्लेषकों का मानना है कि क्रिप्टो पारिस्थितिकी तंत्र को ‘स्टार्टअप-ग्रेड’ से ‘वित्त-बाजार-ग्रेड’ सुरक्षा और संचालन तक ले जाना आवश्यक है। इसके लिए कुंजी प्रबंधन, भूमिका-आधारित पहुँच, कर्तव्यों का पृथक्करण तथा सतत निगरानी जैसे उपायों को अपनाना जरूरी है। FIU-IND के ये कदम केवल नियम लागू करने तक सीमित नहीं है बल्कि क्रिप्टो बाजार में विश्वास निर्माण का भी प्रयास है।

बाजार का विस्तार जारी है

हालांकि नियम सख्त हो रहे हैं, लेकिन बाजार का विस्तार भी जारी है। 2035 तक भारतीय क्रिप्टो बाजार 15 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, और 2025 तक देश में लगभग 119 मिलियन निवेशक मौजूद हैं। इस वृद्धि से यह संकेत मिलता है कि भारतीय उपभोक्ता डिजिटल संपत्तियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, भले ही नियामक ढांचा सख़्त हो रहा हो।

सख्त नियमों के पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि इससे निवेशकों की सुरक्षा बढ़ेगी और विदेशी विनिमय बाजार में भारत की विश्वसनीयता में सुधार होगा। देश के बाहर भी कई अर्थव्यवस्थाएँ अपने क्रिप्टो नियमों को विकसित कर रही हैं, जैसे यूरोपीय संघ के एकीकृत विनियमन और अमेरिका में स्टेबलकॉइन पर नए कानून। वैश्विक स्तर पर क्रिप्टो नियमों में बदलाव का असर भारत पर भी पड़ेगा, जिससे इसके अपने नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने की आवश्यकता बढ़ गई है।

टैक्स बोझ को कम करने का अनुरोध

वहीं निवेशक समुदाय और क्रिप्टो उद्योग के प्रतिनिधियों ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह बजट 2026 में टैक्स और TDS (सोर्स टैक्स डिडक्शन) बोझ को कम करे, जिससे अनौपचारिक बाजारों के बजाय अधिक व्यापार पंजीकृत व नियंत्रित प्लेटफॉर्म पर हो। इससे नियमों के अनुपालन में वृद्धि होगी और अवैध या अनौपचारिक बाजारों पर निर्भरता कम होगी।

भारत में क्रिप्टो के लिए स्पष्ट और संतुलित नियमों का होना आवश्यक है क्योंकि यह एक युवा और तकनीकी-सक्षम निवेशक आधार विकसित कर रहा है, जो डिजिटल वित्त के भविष्य को अपनाने के लिए उत्साहित है।

निष्कर्ष

भारत में क्रिप्टो नियमों का सख़्त होना न केवल वित्तीय पारदर्शिता और धोखाधड़ी नियंत्रण के लिए आवश्यक है, बल्कि डिजिटल गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को सुनिश्चित करने का भी एक महत्वपूर्ण कदम है। सख्त केवाईसी (KYC), साइबर ऑडिट और डेटा संरक्षण मानदंड से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और क्रिप्टो बाजार की विश्वसनीयता मजबूत होगी। संतुलित और स्पष्ट नियमों के साथ, भारत एक सुरक्षित, पारदर्शी और नवोन्मेषी क्रिप्टो वातावरण के निर्माण की दिशा में अग्रसर हो सकता है, जिससे निवेशकों एवं वित्तीय ढांचे दोनों को लाभ मिलेगा।

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