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लेखक: Pratik Bhuyanस्टाफ संपादक
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सूरत में ₹54 लाख की क्रिप्टो ठगी का खुलासा: तीन एजेंट गिरफ्तार

सूरत साइबरक्राइम पुलिस ने तीन एजेंटों को गिरफ्तार किया जिन्होंने पीएलसी Ultima, Aura और BDLT जैसे फर्जी क्रिप्टो कॉइनों में निवेश का लालच देकर निवेशकों से लाखों रुपये ठग लिए।

सूरत में ₹54 लाख की क्रिप्टो ठगी का खुलासा: तीन एजेंट गिरफ्तार
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सूरत में क्रिप्टो स्कैम का पर्दाफाश, तीन एजेंट गिरफ्तार

सूरत में साइबरक्राइम पुलिस ने एक बड़े क्रिप्टो निवेश घोटाले का खुलासा किया है। पुलिस ने तीन एजेंटों को गिरफ्तार किया है जो फर्जी निवेश योजनाओं के माध्यम से लोगों को ऊंचे मुनाफे का लालच देकर ठगी कर रहे थे। आरोपियों की पहचान जयसुख कच्छाडिया, निकुंज अवाइया और हरेश गजेरा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, इन लोगों ने पीएलसी Ultima, Aura और BDLT नामक क्रिप्टो कॉइनों में निवेश का झांसा देकर कई लोगों से लगभग ₹54 लाख की राशि वसूल की।

ठगी का तरीका: विज्ञापन और निवेश सेमिनार का जाल

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अपनी योजना को “वैध निवेश अवसर” के रूप में प्रस्तुत करने के लिए अखबारों में विज्ञापन दिए। इसके अलावा, उन्होंने उदयपुर के एक होटल में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें लगभग 200 लोगों को आमंत्रित किया गया। इस आयोजन में उन्होंने बताया कि कैसे इन कॉइनों में निवेश से निवेशकों को कुछ ही महीनों में कई गुना लाभ मिलेगा।

कार्यक्रम के बाद कई लोगों ने उन पर भरोसा किया और अपनी मेहनत की कमाई इन फर्जी कॉइनों में निवेश कर दी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने ₹51.74 लाख पीएलसी Ultima में, ₹3.01 लाख BDLT में और ₹1.50 लाख Aura में निवेश किया था।

जब वादे टूटे, मामला पहुंचा पुलिस तक

निवेश के कुछ महीनों बाद जब रिटर्न मिलना बंद हो गया और निवेशकों ने रकम वापस मांगी, तो एजेंट टालमटोल करने लगे। शिकायतकर्ता ने जब बार-बार संपर्क करने की कोशिश की, तब जाकर सच्चाई सामने आई कि यह एक सुनियोजित निवेश ठगी थी। इसके बाद उसने सूरत साइबरक्राइम पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की कार्रवाई और कानूनी धाराएं

सूरत साइबरक्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ Gujarat Depositors Protection Act, Prize Chits and Money Circulation Scheme (Banning) Act, Information Technology Act और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अदालत ने तीनों को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है ताकि आगे की पूछताछ और सबूतों की जांच की जा सके।

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पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने निवेशकों से जुटाई रकम को क्रिप्टो वॉलेट्स और अंतरराष्ट्रीय खातों में ट्रांसफर किया, जिससे पैसे की ट्रेसिंग मुश्किल हो गई है। जांच टीम अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि क्या इस स्कीम के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा था।

ठगी का नेटवर्क और निवेशकों की चेतावनी

पुलिस ने बताया कि इस प्रकार की योजनाओं में अक्सर "एजेंट नेटवर्क" के ज़रिए लोगों को जोड़ा जाता है, जहाँ हर एजेंट नए निवेशकों को लाने पर कमीशन पाता है। ऐसे मॉडल को पोंजी या मल्टी-लेवल मार्केटिंग स्कीम की तरह इस्तेमाल किया जाता है ताकि ठगी का दायरा तेजी से बढ़े।

साइबरक्राइम अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि निवेशकों को किसी भी ऐसे प्लेटफॉर्म या स्कीम से दूर रहना चाहिए जो बिना नियामक अनुमति के "गारंटीड रिटर्न" का वादा करती हो। उन्होंने कहा कि वैध क्रिप्टो परियोजनाएं कभी भी फिक्स्ड मुनाफे या त्वरित दोगुने पैसे का दावा नहीं करतीं।

बढ़ती क्रिप्टो ठगी के बीच सख्त निगरानी की जरूरत

भारत में पिछले कुछ वर्षों में क्रिप्टो से जुड़ी ठगी के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में “जल्दी अमीर बनने” की मानसिकता का फायदा उठाकर ठग नई-नई योजनाएं लॉन्च करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टो निवेश को लेकर स्पष्ट नियमों की अनुपस्थिति का फायदा अपराधी उठा रहे हैं।

सरकार और नियामक संस्थानों को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस नीति तैयार करनी होगी ताकि आम निवेशकों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।

निष्कर्ष

सूरत में सामने आया यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि किसी भी निवेश से पहले सतर्कता और शोध जरूरी है। क्रिप्टो बाजार में जोखिम अधिक है, इसलिए बिना पूरी जानकारी और प्रमाणिक स्रोतों की जांच के किसी भी निवेश योजना पर भरोसा नहीं करना चाहिए। पुलिस ने भी जनता से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी संदिग्ध स्कीम की जानकारी तुरंत साइबरक्राइम हेल्पलाइन पर साझा करें।

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